जब मनुष्य नित्य प्रति उठ
घर का पुरा काम करें
तो समझो, योग है यह भी
जब किसान निस्वार्थ
समाज के जीवन के लिए
अहले सुबह अपने खेत को जोते
तो समझो, योग है यह भी
एक मजदूर अपना पसीना बहा
अपने परिवार के जीवन यापन के लिए
जब मजदूरी करें
तो समझो, योग है यह भी
जब जवान सरहद पर
देश के लिए अपना खून बहाए
तो समझो, योग है यह भी
जब राज्य का नेता
निस्वार्थ राज्य के उन्नती का सोचे
तो समझो, योग है यह भी
हम इंसान अपने जीवन का हर पल
दुसरों के भलाई के लिए
न्यौछावर कर दें
तो समझो, योग है यह भी
Written by Radha Rani
No comments:
Post a Comment