Friday, February 27, 2015

मतलबी दुनिया

दुनिया रे दुनिया
मतलब की दुनिया
मतलबी दुनिया
मतलबी इन्सानों से भरी दुनिया
इस मतलबी दुनिया में
ना है कोई तेरा
ना है कोई मेरा
ना है कोई अपना
ना है कोई पराया
इस मतलबी दुनिया में
जीना है तो मतलबी बन
भुल जा इस मतलबी दुनिया को
भुल जा कोई है तेरा
भुल जा कोई है हर सांस मेरी
बंधी है तुझसे
हर आह मेरी
जुड़ी है तुझसे
तुझे कुछ होता है
दिल मेरा रोता है
सच कहती हूँ
बड़ा बेचैन होता है
जी करता है
भाग के आ जाऊँ
लेकिन क्या करूँ
जी करने से
भला कुछ होता है
तु माने या ना माने
हर वक्त दिल बेचैन होता हैमेरा
दुनिया रे दुनिया
मतलब की दुनिया


Written by me

Tuesday, February 24, 2015

चाहत थी उड़ने की

चाहत थी उड़ने की
बहुत ऊँचा उड़ने की
लेकिन न जाने अब लगता है
मेरे पंख कुतर दिए गए हों
याद है मुझे वो हर बात
जीन बातों पे मेरी हंसी रुकती न थी
पर अब तो चेहरे पर
मायुसी का पहरा है
कुछ सपने थे मेरी आंखों में
जो अब धुंधला-धुंधला सा
दिखाई परता है
मेरे भी थे कई अरमान
मगर उन पर आज किसी का पहरा है
चाहत थी उड़ने की

Saturday, February 21, 2015

काले-गोरे का फर्क मिटता नहीं

काले-गोरे का फर्क मिटता नहीं
लोगों पर पड़ा ये धुंध छटता नहीं...
इंसान काला हो या गोरा
इसमें क्या रखा है
फर्क बस इतना है
आज भी लड़कियों को
काला कह के छांट दिया जाता है
काले-गोरे का फर्क मिटता नहीं
लोगों पर पड़ा ये धुंध छटता नहीं...
आज भी लड़कियाँ
एक डर के साए में जीती हैं
न जाने कब काले की परछाई में
उनका जीवन ना धुमिल हो जाए
काले-गोरे का फर्क मिटता नहीं
लोगों पर पड़ा ये धुंध छटता नहीं...
आज भी औरतें
ये सोच के सहम जाती हैं
कहीं उनके अंश को
काले-गोरे के तराजू में
तौल के न रख दिया जाए
काले-गोरे का फर्क मिटता नहीं
लोगों पर पड़ा ये धुंध छटता नहीं...

जी रहे हैं हम

दर्द इतना है
कैसे बयां करूं
बस इतना समझ लो
कि जी रहे हैं हम

वक्त के हाथो ने

वक्त के हाथो ने
ऐसा पटका मुझे
सम्भलने का मौका ना निला
गिरी एसा मैं



HAR PAL...

Har pal unka...
khyal kartey hain
Har pal unka ...
socha kartey hain
Unse milne ke din ...
Hum gina kartry hain
Par unko ye mera khyal
bachkana sa lagta hai
Unko hum har pal
pagal sa dikha kartey hain.
Lekin hum Kaise samjhaye. ..
Hum kitna pyar kartey hain.

ऐसा कभी ना करना

तुम रूठ जाओ मुझसे
ऐसा कभी ना करना
मैं एक नजर को तरसु
ऐसा कभी ना करना
मैं पुछ पुछ हारुँ सौ सौ सवाल
तुम कुछ जवाब ना दो
ऐसा कभी ना करना
मुझसे मिल कर रोना
मुझसे मिल कर हसना
मुझसे बिछड़ कर जी लो
ऐसा कभी ना करना
तुम चले जाओ जब भी
देखुं तुम्हारा रास्ता
तुम लौट कर न आओ
ऐसा कभी ना करना

आंसू

आँखों से बहकर बेकार जाते हैं
ऐ दोस्त मेरे आंसू भी हार जाते हैं
आँखों की पुतली से
पलकों तक आते हैं
पलकों के किनारे से
गालों तक आते हैं
जब आँखें मिल जाती हैं
बेशुमार आते है

धूप-छांव सी जिन्दगी

धूप-छांव सी जिन्दगी
रंग बदलती जिन्दगी
कभी रुलाती
कभी हंसाती
कभी सताती जिन्दगी
हम इस जिन्दगी के मकर जाल में
पल-पल फसते जा रहें
कुछ तो है बात इसमें
जो हमें लुभाती जिन्दगी

Tuesday, February 3, 2015

वो कहते हैं मैने गलती की..


वो कहते हैं मैंने गलती की..
हां, मैंने गलती की..
पर ये गलती, ऐसी सजा की
हकदार तो ना थी…
वो कहते हैं...
मैं गलती-पे-गलती करती हूँ
हां, मैं गलती-पे-गलती करती हूँ
इसकी वजह भी तो वही हैं
वो कहते हैं..
कब हलती करना छोड़ोगे
हां, मैं चाहती तो हूँ
की गलती ना करूँ..
पर मैं भी इंसान हूँ
हो जाती है गलती
अगर गलती ना करती
तो भगवान ना हो जाती
वो कहते हैं मैने गलती की..



Written by: Radha Rani

अब भी दिल रो देता है

अब भी दिल रो देता है जब भी उन गलियों से गुजरती हूं तेरे होने का एहसास होता है अचानक से कदम खुद रुक जाते हैं और मैं वहीं एक टक तुम्हें वही ढु...