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Friday, June 26, 2015

हमारा दो मिनट

हमारा दो मिनट
सबसे प्यारा दो मिनट
सबका दुलारा दो मिनट
आँखों का तारा दो मिनट
सुबह में दो मिनट
शाम होते ही दो मिनट
जब मन चाहे दो मिनट
आधी रात को भी दो मिनट
यारों ये दो मिनट
क्या खत्म हो जाएगा ये दो मिनट???
अब मम्मी कैसे कहेगी
बस दो मिनट…..
 
 
 
Written By:- Radha Rani

Friday, March 20, 2015

दिल इतना खुश है आज













दिल इतना खुश है आज
कि शक सा होता है
कहीं ये सपनो की तरह
सुबह होते ही
आंखो से अोझल ना हो जाए
कहीं ये पानी के बुलबुले की तरह
गायब ना हो जाए
दिल इतना खुश है आज…
कि झुमने को मन करता है
आज हवाअों में उड़ने को मन करता है
अगर आज गम भी आ जाए तो
उसे भी ना आने का
पता देने को मन करता है…..

Sunday, March 8, 2015

जागो नारी जागो


अब ना रुकेंगे
अब ना झुकेंगे
इंकलाब ला के रहेंगे
अपने हक के लिए लड़ेंगे
अपने पे हुए एक-एक
अत्याचार के लिए लड़ेंगे
भागो....... दौड़ो
जागो नारी जागो
अपने अस्तित्व को पहचानों
तुम देवी हो...अबला नहीं
तुमपे जुल्म करने वालों का
तुम ही अब संहार करो
जागो नारी जागो

Written by me

Friday, February 27, 2015

मतलबी दुनिया

दुनिया रे दुनिया
मतलब की दुनिया
मतलबी दुनिया
मतलबी इन्सानों से भरी दुनिया
इस मतलबी दुनिया में
ना है कोई तेरा
ना है कोई मेरा
ना है कोई अपना
ना है कोई पराया
इस मतलबी दुनिया में
जीना है तो मतलबी बन
भुल जा इस मतलबी दुनिया को
भुल जा कोई है तेरा
भुल जा कोई है हर सांस मेरी
बंधी है तुझसे
हर आह मेरी
जुड़ी है तुझसे
तुझे कुछ होता है
दिल मेरा रोता है
सच कहती हूँ
बड़ा बेचैन होता है
जी करता है
भाग के आ जाऊँ
लेकिन क्या करूँ
जी करने से
भला कुछ होता है
तु माने या ना माने
हर वक्त दिल बेचैन होता हैमेरा
दुनिया रे दुनिया
मतलब की दुनिया


Written by me

Tuesday, February 24, 2015

चाहत थी उड़ने की

चाहत थी उड़ने की
बहुत ऊँचा उड़ने की
लेकिन न जाने अब लगता है
मेरे पंख कुतर दिए गए हों
याद है मुझे वो हर बात
जीन बातों पे मेरी हंसी रुकती न थी
पर अब तो चेहरे पर
मायुसी का पहरा है
कुछ सपने थे मेरी आंखों में
जो अब धुंधला-धुंधला सा
दिखाई परता है
मेरे भी थे कई अरमान
मगर उन पर आज किसी का पहरा है
चाहत थी उड़ने की

Saturday, February 21, 2015

काले-गोरे का फर्क मिटता नहीं

काले-गोरे का फर्क मिटता नहीं
लोगों पर पड़ा ये धुंध छटता नहीं...
इंसान काला हो या गोरा
इसमें क्या रखा है
फर्क बस इतना है
आज भी लड़कियों को
काला कह के छांट दिया जाता है
काले-गोरे का फर्क मिटता नहीं
लोगों पर पड़ा ये धुंध छटता नहीं...
आज भी लड़कियाँ
एक डर के साए में जीती हैं
न जाने कब काले की परछाई में
उनका जीवन ना धुमिल हो जाए
काले-गोरे का फर्क मिटता नहीं
लोगों पर पड़ा ये धुंध छटता नहीं...
आज भी औरतें
ये सोच के सहम जाती हैं
कहीं उनके अंश को
काले-गोरे के तराजू में
तौल के न रख दिया जाए
काले-गोरे का फर्क मिटता नहीं
लोगों पर पड़ा ये धुंध छटता नहीं...

जी रहे हैं हम

दर्द इतना है
कैसे बयां करूं
बस इतना समझ लो
कि जी रहे हैं हम