Friday, August 28, 2020

पढोगे लिखोगे बनोगे नवाब

 

मालदे सूरज के मुह पे मलाई

बुडबक बादल पे करदे चढ़ाई

खोल किताबें करे हम पढाई

सुनो सुनो दिल की सुनो

डरोगे नहीं शेर बनो

पढोगे लिखोगे बनोगे नवाब

जो तुम खेलोगे कूदोगे तो होगे ख़राब

बदमाशियों से जरा बाज़ आओ

थोडा किताबों से भी दिल लगाओ

विद्या कसम हम पढेंगे दबा के

मगर तुम भी देखो किताबों से आगे

बढ़ो ज़रा आग बढ़ो

लिखा नहीं जो वो पढो

पढोगे लिखोगे बनोगे नवाब

जो तुम खेलोगे कूदोगे तो होगे ख़राब

ऐसे हवा में जो उड़ता फिरेगा

मंडे को टीचर का डंडा पड़ेगा

पेट दर्द का मैं करूँगा बहाना

केंसल है मंडे को स्कूल जाना

जिद मेंटेन करो

चढ़ो माउंटेन चढ़ो

पढोगे लिखोगे बनोगे नवाब

जो तुम खेलोगे कूदोगे तो होगे ख़राब || 



Sunday, August 23, 2020

थोड़ी सी रौशनी बहुत है

 

थोड़ी सी रौशनी बहुत है
तेरे संग जिवन बिताने के लिए 
जिवन में आए 
हर एक अंधकार को
हमारे बीच में उजाला लाने के लिए 
थोड़ी सी रौशनी बहुत है•••

आओ हम यूँही
एकदूजे का साथ दें
6 साल तक क्या 
अगले सात जन्मों तक
साथ देने का वादा कर लें
थोड़ी सी रौशनी बहुत है
चलो, फिर से जिने का वादा कर लें•••

बड़े मन्नतों से मिले हो तुम मुझे
हां, बड़े मन्नतों से मिले हो तुम मुझे
यूँही अकेला तो छोर न पाऊंगी तुम्हें
मर जाऊंगी मैं तुमसे पहले अगर
तो साया बन साथ निभाऊँगी मैं 
पर अभी थोड़ी सी रौशनी बहुत है
तेरे संग जिवन बिताने के लिए ।।

Written by Radha Rani 


अब भी दिल रो देता है

अब भी दिल रो देता है जब भी उन गलियों से गुजरती हूं तेरे होने का एहसास होता है अचानक से कदम खुद रुक जाते हैं और मैं वहीं एक टक तुम्हें वही ढु...