Thursday, August 30, 2018

स्नेह, प्यार, ममता, दुलार... बस मिल जाए


याद है मुझे... उसकी मासुमियत
अलहर सी...हर वक्त फुदकती रहती थी
उसका भोलापन, उसकी सादगी ही
उसका खजाना हुआ करता था
पर आज उसे देखती हूं तो
लगता है मानो वो खो गई हो
वो अब वो न रही
काफी बदली सी नज़र आ रही थी
आखि़र क्या हो गया उसे
मैंने पूछा , कहां खो गई हो तुम
तुम्हारी हंसी किधर गुम है
बोली, मैंने उसे कैद कर रखा है
बस ढूंढ रही हूं, लोगों के अंदर
स्नेह, प्यार, ममता, दुलार
मिल जाए तो मुक्त कर दुंगी
उस हंसी को, जिसे मैंने कैद कर रखा है
जो कभी मेरे पल-पल की साथी थी
बस ढूंढ रही हूं, लालची लोगों के अंदर
स्नेह, प्यार, ममता, दुलार
बस मिल जाए।।

राधा रानी

Thursday, August 23, 2018

आखि़र क्या चाहते हैं हम



आखि़र क्या चाहते हैं हम
अंधों की तरह दौरे चले जा रहे हैं
क्या है हमारी मंजिल
किस चिज़ की तड़प है
जिसे पाने के लिए अनेकों पाप के 
भागीदार बने जा रहें हैं..
थोड़े से पैसों के लिए 
अपना इमान बेच रहे हैं..
चंद ऐशो-आराम के लिए 
मां-बाप को वृद्धाश्रम भेज रहे हैं..
अपने हवस की भुख के लिए
अपने ही बहु-बेटियों को नोच रहे हैं..
थोड़े से समय को बचाने के लिए
ट्रैफिक रुल तोड़ रहे हैं..
आखि़र क्यों?
क्यों अपने बच्चों को अकेला कर रहे हैं
क्यों परिवार से दूर हो रहें हैं
क्यों अपने ही देश को निर्धन बना रहे हैं
आखि़र क्यों?
आखि़र क्या चाहते हैं हम....

राधा रानी

Monday, August 20, 2018

तेरे ख्यालों से..!!

तू ही हकीकत
तू ही खवाब 
तुझसे ही मेरा कल 
तुझसे ही मेरा आज
तु ही मेरी दुनिया 
तु ही मेरा सपना 
लाख करले लोग जुदा 
हो न सकुं तुझसे जुदा
रहती हूँ दूर तुझसे
पर रहती नहीं दूर
तेरे ख्यालों से..!!

राधा रानी

Friday, August 17, 2018

हमें आजादी चाहिए

आजादी है हमें लानी
आजादी है हमें पानी
लानी है हमें ...
लड़कियों के मन में आजादी
दिलानी है हमें ...
उनके हौसले को आजादी
हमें आजादी नाम की नहीं
हमें सच की आजादी चाहिए।
हमें आजादी उस डर से चाहिए
जिस डर की आहट हमें
कदम-कदम पर डराती है।
हमें आजादी उन नज़रों से चाहिए
जिन नज़रों में वासना भरी हो।
हमें आजादी उन दबी-कुचली सोंच से चाहिए
जिस सोंच के आगे हम बेबस हो जाते हैं।
हमें आजादी उन चार दिवारी से चाहिए
जिन दिवारों ने हमें ...
उड़ने का मौका नहीं दिया।
अब हमें आजादी चाहिए
और हम ये पा कर रहेंगे
ताकि हम उड़ सके
मुक्त हो कर...खुली हवा में।।

राधा रानी

Sunday, August 12, 2018

मुझे अच्छा नहीं लगता

मुझे अच्छा नहीं लगता
तुम्हें परेशान करना
पर क्या करें, ये गलती बार बार होती है।
मुझे अच्छा नहीं लगता
तुम्हें खफ़ा करना
पर क्या करें, तुम्हें खफ़ा बार बार करती हूं।
मुझे अच्छा नहीं लगता
तुमसे दूर जाना
पर क्या करें, मुझे मेरी जरुरत 
तुमसे दूर ले जाती है।
मुझे अच्छा नहीं लगता
लोगों का तुमसे दूर जाना
पर क्या करें यार
मैं लोगों की सोच बदल नहीं सकती।
मुझे अच्छा नहीं लगता
तुम्हारा तनहा तनहा रहना 
पर क्या करुं, मैं कुछ कर नहीं सकती।
ILoveYou

Radha Rani

Saturday, August 11, 2018

बिंदी

बिंदी से श्रृंगार यौवन का
बिंदी से ही सुहाग सलामत
बिंदी से ही लगता हमेशा
हमारे रूप में चार चांद
शादी से पहले रूप निखारे
शादी बाद बने सुहाग 
हर औरत के चेहरे पर बिंदी
कर जाए कुछ अलग कमाल
छोटी हो या बड़ी बिंदी
हर चेहरे पर शोभती है
काली हो तो फैशन है
लाल हो तो सुहागिन है
पर मत भुलो इन सब के अलावा भी
बिंदी कुछ और ही काम कर जाती है
एक्यूप्रेशर के द्वारा बिंदी 
मन की शांति पहुचाती है।।

Radha Rani

Friday, August 3, 2018

कहां फंस गए हैं


कहां फंस गए हैं 
कुछ समझ नहीं आता
शांति की चाहत 
बढ़ती ही जा रही है
चारों तरफ लोग हैं
कोई अपना नहीं 
सभी के चेहरों पर 
एक मुखौटा लगा है
पल में कोई अपना होता है
पल में पराया
चहूं ओर फरेब है मक्कारी है
ऐसे हैं लोग जो अपने कहलाते हैं
कहां फंस गए हैं 
निकल नहीं पा रहें।।

राधा रानी

अब भी दिल रो देता है

अब भी दिल रो देता है जब भी उन गलियों से गुजरती हूं तेरे होने का एहसास होता है अचानक से कदम खुद रुक जाते हैं और मैं वहीं एक टक तुम्हें वही ढु...