Thursday, September 27, 2018

जय हो गुगल देव की

जय हो गुगल देव की
हम तेरे ही गुण गाते हैं
चरणों में सीस झुकाते हैं 
हम तेरे ही गुण गाते हैं
अगर तुम ना होते
हमें जानकारी कहां मिलती
जानकारी तो है ही
हमें तस्वीरें कहां मिलती
हर दफ्तर की पहली जरूरत
हर छात्र की किताब हो तुम
तुम ही हमारे माता-पिता
सखा भी तुम हो बंधु भी तुम
गुरु भी तुम, भगवान भी तुम
जय हो गुगल देव की
हम तेरे ही गुण गाते हैं
चरणों में सीस झुकाते हैं 
हम तेरे ही गुण गाते हैं

राधा रानी

Monday, September 24, 2018

तेरी तारीफ में मैं क्या लिखूं जिंदगी

तेरी तारीफ में 
मैं क्या लिखूं जिंदगी
शब्द कम पड़ जाते हैं
जब तेरी तारीफ करती हूं
जिंदगी बीत रही है 
तुम्हारी तारीफ के पुल बनाते हुए
पर ना मैं थकी ना ही मेरी कलम 
तुम भरसक मेरी निंदा करते रहे
औरों से तुलना और 
खुद से दूर करते रहे
पर मैं तुम्हारे ही गुण गाती रही
तुमने कभी मुझे चैन की सांस नहीं दी
पर मैंने तुम्हें चैन से जीया है
तेरी तारीफ में 
मैं क्या लिखूं जिंदगी
शब्द कम पड़ जाते हैं
जब तेरी तारीफ करती हूं

राधा रानी

Friday, September 21, 2018

हंसना मना है


आज के लाइफ स्टाइल से
दुनिया हुई कलरफुल
लड़कियां पहनती जींस है
लड़के पहनते साड़ी
फिर भी लड़कों का ना होता रेप है
ना होती बेइज्जती भारी
बोलो तारा रा रा रा
पर सुनो...हंसना मना है।।

जिंदगी बीत गए मां को 
बेटे के लिए खाना बनाते
आज एक बीवी के लिए
बेटे खाना बनाते
शर्म नहीं आती उन बेटों को
अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम पहुंचाते
बोलो तारा रा रा रा
पर सुनो... हंसना मना है।।

पानी बरसा छम छम छम
छाता लेकर निकले हम
पैर फिसला गिर गए हम
कीचड़ ऊपर नीचे हम
सड़क पर कुड़ा फेंकते हम
फिर भी सरकार को गाली देते हम
बोलो तारा रा रा रा
पर सुनो, हंसना मना है।।

राधा रानी

Wednesday, September 19, 2018

अच्छा नहीं हुआ

इन चंद महीनों के दौरान
जो हुआ
वो अच्छा नहीं हुआ
ना मुझमें सय्यम रहा
ना उसने सेय्यम रखा
दोनों ने खोया
कुछ हासिल न हुआ
चंद लालची लोगों का ही
बोलबाला रहा
जो भी हुआ
अच्छा नहीं हुआ
मैं थी ही बेवकूफ
पर तुम भी समझदार न थीं
तुम्हें समझाना मेरा
सब बेकार गया
तुम्हें भी वही मिला
जो मुझे मिला
इन चंद महीनों के दौरान
जो हुआ
वो अच्छा नहीं हुआ।।

राधा रानी

Friday, September 14, 2018

हिन्दी दिवस की हार्दिक बधाई

अ से अ:
क से ज्ञ
इनसे बनती हिन्दी वर्णमाला है
हिन्दी के हर शब्दों की 
बनती इन्हीं से माला है
हम भारत के रहने वाले
हिन्दी हैं हम...कहे जाते हैं
हिन्दी भाषा ही ...
भारत की राजभाषा है
हिन्दी दिवस की हार्दिक बधाई

राधा रानी

Sunday, September 9, 2018

किताबें बात करना चाहती हैं...

कई अरसों से 
तुम्हें मेरी याद नहीं आईं
कैसे भुला दिया तुमने
मेरे स्पर्श को
जब तुम घंटों मुझे छुआ करते थे
मुझे निहारा करते थे
तब मुझे मेरे होने का
एहसास हुआ करता था
कैसे भुला दिया तुमने
मेरे हरपल के साथ को
बचपन में स्कूल तक
जवानी में कालेज तक 
दिन में पार्क तक
रात में नींद आने तक 
तुम्हारा साथ दिया मैंने
पर आज क्या हुआ
क्यों अकेला छोड़ दिया मुझे
यूं आलमारी में सड़ने के लिए
सिर्फ मोबाइल और कंप्यूटर के लिए
मैं हरपल तुम्हारी राह तकती हूं
सायद आज छु लो मुझे
मुझे यूं अकेला न छोड़ो
दम घुटता है मेरा
यूं आलमारी में परे परे।।

राधा रानी :)

Saturday, September 8, 2018

चना, चुड़ा, मुंगफली, मकई


मुड़-मुड़ करती
चुड़-चुड़ करती
मन को बहुत भाती है
चना, चुड़ा, मुंगफली, मकई
भुंनकर बनाई जाती है
मन चाहे तो खाते रोज 
पर शनिवार को अहम है
कहते सब ये ग्रह को काटे
भुंजा इसका नाम है
आसानी से भुख मिटाती
सस्ते में आ जाती है
गुरूवार को खाने से 
बृहस्पति नाराज हो जाते हैं
आज खाते-खाते ये भुंजा मुझको
मन को इतने भाया है
इसलिए ये कविता मैंने 
आपको पढ़ाया है।। 

राधा रानी

Tuesday, September 4, 2018

शुक्रिया सर....!

शुक्रिया सर.....

हमारे जीवन के पहले गुरु ... मैं उनको शुक्रिया कहना चाहती हूं, जिन्होंने मुझे क और ख लिखना सिखाया। 

मैं उनको धन्यवाद कहना चाहती हूं जिन्होंने मुझे अपने बकरी चराने के वक्त भी मुझे कखगघड़ पढ़ना सिखाया। 

मैं उनको धन्यवाद कहना चाहती हूं जिन्होंने मुझे +-*√× सिखाया और साथ साथ डरना सिखाया कि कैसे पढ़ाई न करने और मार खाने की डर से सारे जगह से डंडा हटाना।

मैं उनको शुक्रिया कहना चाहती हूं जिन्होंने मुझे हिम्मत दी की मैं फिर से पढ़ाई शुरू कर सकूं।(उस वक्त 3rd क्लास में फेल होने के कारण मां ने मेरी पढ़ाई बंद कर दी थी।)और उन्हीं के वजह से मैं आज तक पीछे मुड़ कर नहीं देखी।

इस बीच मैंट्रीक के समय पढ़ाने वाले संस्कृत शिक्षक का भी धन्यवाद कहना चाहती हूं जिन्होंने मेरा संस्कृत पढ़ना आसान बनाया।

मैं जिस काम के कारण जानी जाती हूं (Editing) को सिखाने वाले गुरु को भी शुक्रिया कहना चाहती हूं।

मैं वो हर इंसान को धन्यवाद कहना चाहती हूं जिन्होंने मुझे जिंदगी में कुछ न कुछ सिखाया ही है।

मैं नहीं जानती कि हमारे बचपन के टिचर जिंदा भी हैं या नहीं... पर मुझमें तो वो कहीं न कहीं दिखाई दे जाते हैं।

Happy Teacher's Day
धन्यवाद
राधा रानी

अब भी दिल रो देता है

अब भी दिल रो देता है जब भी उन गलियों से गुजरती हूं तेरे होने का एहसास होता है अचानक से कदम खुद रुक जाते हैं और मैं वहीं एक टक तुम्हें वही ढु...