Saturday, October 28, 2017

अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य



सुर्य को अर्घ्य देती मेरी मां
आज छठ पर्व का तीसरा दिन था... आज अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया गया...हम लोगों ने बड़े धुमधाम से आज का दिन बिताया...

छठ पर्व के आज के दिन ..अहले सुबह से ही हमारी मां उठ के ठेकुआ बनाने में लग गयीं थी....

ठेकुआ बनाने के लिए सुबह सुबह उठकर , स्नान किया जाता है... फिर आटा - चीनी और मोम( घी) को मिलाकर सान लिया जाता है... फिर उसके छोटे छोटे गोली बनाकर सांचे में गढ़ लिया जाता है... और उसके बाद उसको गर्म घी में तल लिया जाता है... ठेकुआ गुड़ का भी बनाया जाता है...

सारे काम होने के बाद डाला सजाया जाता है...डाले में...सारे फल से दो दो फल और ठेकुआ को सुप में डाल कर डाला सजाया जाता है...इन फलों में त्रिफला का बहुत महत्व होता है...आज के दिन इसकी कीमत आसमान छुने लगती हैं....

डाला सजाने के बाद घर के कोई पुरुष उस डाले को अपने सिर पर उठा के घाट पर जाते हैं... एक बार डाला उठाने के बाद सीधे घाट पर ही रखा जाता है... पुरा घर का परिवार घाट पर जाता है... रास्ते में महिलाएं छठ माई के गीत गाते जाती हैं ... फिर घाट पहुंच कर व्रती पानी में खड़ी हो कर सुर्य को प्रणाम करते हुए सूर्य को अर्घ्य देती हैं...

ये पुजा एक पारिवारिक पुजा है... इस पर्व में घर के सारे लोग मिलजुल कर सम्मलित होते हैं...
छठ में हर कोई ...छोटा हो या बड़ा सब मिलकर योगदान
देते हैं ...

 इस पर्व में लोग हर गली-मोहल्ले को रास्ते को साफ कर के सजाते हैं... जिसके कारण छठ व्रतियों को सड़क पर चलने में कोई दिक्कत न आए... छठ का पर्व आस्था का पर्व है।


.... राधा रानी....

No comments:

Post a Comment

अब भी दिल रो देता है

अब भी दिल रो देता है जब भी उन गलियों से गुजरती हूं तेरे होने का एहसास होता है अचानक से कदम खुद रुक जाते हैं और मैं वहीं एक टक तुम्हें वही ढु...