Tuesday, April 23, 2019

तकदीर से लड़ जाएंगे

तकदीर से लड़ जाएंगे
पर अपना आशियाना बनाएंगे
आज किस्मत में कुछ भी हो
मगर एक दिन किस्तम जगाएंगे
तुम मेरा साथ दो या ना दो
तकदीर से लड़ जाएंगे
फिर भी तुम्हें पाएंगे
सपना है, अपना आशियाना हो
तुम हो..मैं रहुं और साथ 
हमारी परछाईं हो
तकदीर से लड़ जाएंगे
पर अपना आशियाना बनाएंगे

Written By Radha Rani

Wednesday, January 2, 2019

साल का पहला दिन


साल का पहला दिन
और मां बहन का साथ
हर साल की तरह 
इस साल भी उनका साथ
ना कुछ नया ..ना ही कुछ पुराना
बस एक प्यारी सी बात
मेरे लाडले का नया साल
और विर कुंवर सिंह पार्क 
सब अनोखा..प्यारा ..
दिल को छूने वाला
एक प्यारा सा एहसास।।

Written by Radha Rani

नए साल की बात है

नए साल की बात है
नए मंसुबे गढ़ने हैं
कुछ नए दोस्त बनाने हैं
तो पुराने दोस्तों से मिलने हैं।

नए साल की बात है
सच्चाई की राह पर चलना है
कुछ सच्चों को अपनाना है
तो झुठों को दूर भगाना है।

नए साल की बात है
बिखरे रिश्तों को सम्भालना है 
तो कुछ रिश्तों से दूरी बनाना है।

नए साल की बात है
एक नई ऊंचाइयों को छूना है
और अपने सपनों को सजाना है।।

Written by Radha Rani

चल ख्वाब देखते हैं

चल ख्वाब देखते हैं
जो पुरे ना हुए कभी
और शायद पुरे ना हों कभी 
ऐसे हर पल-पल बुने हम सभी।
चल ख्वाब देखते हैं
ऐसे जीत का 
जो होनी पक्की है
क्योंकि हमने हारना सीखा नहीं।
चल ख्वाब देखते हैं
ऐसे खुशियों का
जिसकी चाहत मुझे शिद्दत से है
चल ख्वाब देखते हैं।।

Written by Radha Rani

Friday, December 28, 2018

साल गुजरने वाला है

दो दिन बचे हैं बस
साल गुजरने वाला है
जो भी गीले शिकवे हैं
आपस में बांट लें हम
क्योंकि साल गुजरने वाला है
आने वाले साल में
एक प्रण लें लें हम
जो बुरा किया बीते साल में
वो ना दुहराए नए साल में
जो भी अच्छा हुआ इस साल
यही कोशिश रहेगी नए साल।।

Written by Radha Rani

Tuesday, November 20, 2018

मेहनत नहीं होता मुझसे...

सुबह सवेरे रोज उठ 
झाड़ू कटका करती हूं
फिर भी ‌लोग कहते फिरते हैं
मेहनत नहीं होता मुझसे।

सर्वप्रथम स्नान कर 
पुजा पाठ करती हूं
फिर रसोई में जाकर
खाना रोज बनातीं हूं
फिर भी ‌लोग कहते हैं
मेहनत नहीं होता मुझसे।

घर के सारे काम कर
आफिस रोज जाती हूं
वहां जाकर रोज रोज
अपना काम ‌करती हूं
फिर भी ‌लोग कहते हैं
मेहनत नहीं होता मुझसे।

हर रोज रात का 
खाना मैं ही बनाती हूं
फिर सबको खाना खिलाकर
तब खुद खाती हूं
फिर भी ‌लोग कहते रहते हैं
मेहनत नहीं होता मुझसे।

Radha

अब भी दिल रो देता है

अब भी दिल रो देता है जब भी उन गलियों से गुजरती हूं तेरे होने का एहसास होता है अचानक से कदम खुद रुक जाते हैं और मैं वहीं एक टक तुम्हें वही ढु...