Saturday, February 8, 2020

मेरी परछाईं


मैं थी
मैं हूं
मैं रहुँगी
मुझे याद करो
या ना करो
मैं जिंदा रहुँगी हमेशा
उसकी बातों में
उसकी आदतों में
वो मेरी परछाईं हैं
मैं मिट जाउँगी
मिट्टी बन जाउँगी...
पर मैं छोड़ जाउँगी
तुम्हें मेरी एहसास के लिए
अपनी परछाईं

Written By Radha Rani

Saturday, July 27, 2019

बहुत हुआ


कब से तेरी तलब थी

कब से तेरी तलब थी
आकर अब मिली हो
सुबह से एक घुंट को
तरस गए थे हम
सोच रहे थे हम
कब आओगी
और आकर..मेरे होंठो को छु जाओगी
कब से तेरी तलब थी
आकर अब मिली हो☕️☕️☕️☕️

Written By Radha

जिद्दी मन मेरा


अब भी दिल रो देता है

अब भी दिल रो देता है जब भी उन गलियों से गुजरती हूं तेरे होने का एहसास होता है अचानक से कदम खुद रुक जाते हैं और मैं वहीं एक टक तुम्हें वही ढु...