Tuesday, November 20, 2018

मेहनत नहीं होता मुझसे...

सुबह सवेरे रोज उठ 
झाड़ू कटका करती हूं
फिर भी ‌लोग कहते फिरते हैं
मेहनत नहीं होता मुझसे।

सर्वप्रथम स्नान कर 
पुजा पाठ करती हूं
फिर रसोई में जाकर
खाना रोज बनातीं हूं
फिर भी ‌लोग कहते हैं
मेहनत नहीं होता मुझसे।

घर के सारे काम कर
आफिस रोज जाती हूं
वहां जाकर रोज रोज
अपना काम ‌करती हूं
फिर भी ‌लोग कहते हैं
मेहनत नहीं होता मुझसे।

हर रोज रात का 
खाना मैं ही बनाती हूं
फिर सबको खाना खिलाकर
तब खुद खाती हूं
फिर भी ‌लोग कहते रहते हैं
मेहनत नहीं होता मुझसे।

Radha

Monday, October 29, 2018

बचपन की दिवाली

बचपन की दिवाली में भी खुशियां थी
और आज भी खुशियां ही खुशियां है।

फर्क बस इतना है दोस्तों
पहले दीपावली थी
आज बलवावली है।

पहले दिवाली गरीबों और अमीरों की थी
पर आज सिर्फ अमीरों की है।

पहले दिवाली से प्रदुषण कंट्रोल होता था
पर आज प्रदुषण ही प्रदुषण होता है।

बचपन की दिवाली में मां 
अनेकों पकवान बनातीं थी
पर आज एक भी बन जाए बहुत है।

बचपन की दिवाली में प्यार था
स्नेह था, ममता थी, अपनापन था
पर आज हर तरफ 
नफ़रत है, लुट है, धोखा है।

फिर भी दिवाली मनानी है
तो मनाओ दिवाली
जलाओ दिवाली।

Happy Dipawali
Radha Rani

Friday, October 26, 2018

एक छोटी सी हिकारत है

एक छोटी सी सिकायत है 
मुझे मेरे रब से
तुमने मुझे बनाया क्यों
अगर बनाया तो बनाया
ऐसी जिंदगी मुझे दी क्यों
जिसका न तो कोई ओर है 
ना ही कोई छोर
जिये जा रहे हैं, जिये जा रहे हैं
बस यूं ही मजे किए जा रहे हैं
ना ही किसी की फ़िक्र है
ना ही किसी की जिक्र
ना ही कोई सपना है
ना ही कोई अपना है
बस जिये जा रहे हैं
जिये जा रहे हैं
बस मज़े किए जा रहे हैं।।

Radha Rani

Friday, October 5, 2018

थक गई है नज़र



बीच चौराहे पर खड़ी
देख रही थी दूर से
आते-जाते उन गाड़ियों को
रौंद रही थी वे 
मेरी प्यासी नज़रों को
मेरी नज़र थी प्यासी
उस मंजिल की चाह में
जिसका न कोई छोड़ था
ना ही कोई निशान।
जब मेरी नज़र थक गई
सोच में पड़ गई मैं
कब विराम आएगा
जिंदगी की इस राह में।।

राधा रानी

Thursday, September 27, 2018

जय हो गुगल देव की

जय हो गुगल देव की
हम तेरे ही गुण गाते हैं
चरणों में सीस झुकाते हैं 
हम तेरे ही गुण गाते हैं
अगर तुम ना होते
हमें जानकारी कहां मिलती
जानकारी तो है ही
हमें तस्वीरें कहां मिलती
हर दफ्तर की पहली जरूरत
हर छात्र की किताब हो तुम
तुम ही हमारे माता-पिता
सखा भी तुम हो बंधु भी तुम
गुरु भी तुम, भगवान भी तुम
जय हो गुगल देव की
हम तेरे ही गुण गाते हैं
चरणों में सीस झुकाते हैं 
हम तेरे ही गुण गाते हैं

राधा रानी

Monday, September 24, 2018

तेरी तारीफ में मैं क्या लिखूं जिंदगी

तेरी तारीफ में 
मैं क्या लिखूं जिंदगी
शब्द कम पड़ जाते हैं
जब तेरी तारीफ करती हूं
जिंदगी बीत रही है 
तुम्हारी तारीफ के पुल बनाते हुए
पर ना मैं थकी ना ही मेरी कलम 
तुम भरसक मेरी निंदा करते रहे
औरों से तुलना और 
खुद से दूर करते रहे
पर मैं तुम्हारे ही गुण गाती रही
तुमने कभी मुझे चैन की सांस नहीं दी
पर मैंने तुम्हें चैन से जीया है
तेरी तारीफ में 
मैं क्या लिखूं जिंदगी
शब्द कम पड़ जाते हैं
जब तेरी तारीफ करती हूं

राधा रानी

अब भी दिल रो देता है

अब भी दिल रो देता है जब भी उन गलियों से गुजरती हूं तेरे होने का एहसास होता है अचानक से कदम खुद रुक जाते हैं और मैं वहीं एक टक तुम्हें वही ढु...