Thursday, June 14, 2018

बेहिसाब शिकवे हैं


बेहिसाब शिकवे हैं तुझसे ऐ जिंदगी
तुझसे गिला करूं या रहने दूं
बचपन से जवानी बीती
अब आया है अंतिम दौर
जो भी चाहा पाया है
पर पा न सकी हूं चैन।
जिंदगी के भागम-भाग से
अब थक गई हूं मैं
कुछ तो रहम दिखा मुझपर
क्या तुझको भी नहीं है चैन।
बेहिसाब शिकवे हैं शिकायत है
तुझसे ऐ जिंदगी, कैसे करूं बयां।

Written by Radha R

Wednesday, June 13, 2018

घर से कुछ दूरी पर


घर से कुछ दूरी पर
एक कुआं है गहरा
कहते हैं लोग वहां के
वहां भुतों का है पहरा
भुतों के रिश्तेदारों का 
हैं वहां बसेरा
होती है आधी रात जब
चलती भुतों की पार्टीयां 
खुब बजते हैं गाजे-बाजे
खुब बटतें है पत्ते
भुत रोज खाना बनाते
भुगतनी खेलती रम्मी
घर से कुछ दूरी पर
एक कुआं है गहरा
कहते हैं लोग वहां के
वहां भुतों का है पहरा।

Written By Radha Rani

भूल गए क्या तुम?

भूल गए क्या तुम?
वो हमारी पहली मुलाकात
जब मैं तुमसे मिली थी
मैं मिलो दूर से मिलने आई थी 
तुम्हारी एक झलक के लिए
तुम्हारी और  हमारी पहली मुलाकात
मैंने पहली बार कदम उठाया था
कुछ साहस करने की हिम्मत जुटाई थी
अपनों से दगा किया था
भूल गए क्या तुम?
तुम्हारे लिए अपनों से लड़ी थी
सिर्फ तुमको पाने के लिए
तुमसे प्यार जो करती थी
बेइंतहा प्यार
भूल गए क्या तुम?

Written By Radha Rani

Sunday, June 10, 2018

आईने से बैर मत रख


आईने से बैर मत रख
तु आईने से यारी रख
आईना झुठ नहीं बोलता
आईना दिखाता है हकीकत
आईना तुझे संवारेगा
आईना तुझे बिगाड़ेगा
तु रोएगा तो वो रोएगा
तु हंसेगा तो वो हंसेगा
आईने से बैर मत रख
तु आईने से यारी रख।
आईना दिखाता है खामियां
आईना दिखाता है अच्छाईयां
वही है अकेलेपन का साथी
आईना ही तो आज दोस्त है हमदम है
आईने से बैर मत रख
तु आईने से यारी रख।

   Written by Radha Rani

Saturday, June 9, 2018

जहां रौशनी का मिलन हो रहा था



जहां रौशनी का मिलन हो रहा था
वहां एक कहानी रची जा रही थी
वो कहानी जो मेरी थी
वो कहानी जो हमारी थी
वो रौशनी हम ही तो थे
जो वर्षों बाद मिल रहे थे
हम दो रौशनीयों के मिलन से 
तुम आए थे 
हमारी जिंदगी में उजाला भरने
हमारी जिंदगी सवारने
अपने प्यारे से मुस्कान से
मेरी मुस्कान को दोगुना करने
आज तुम ही तो हो 
मेरी आंखों के उजाले
तुम ही तो आए थे
मेरा घर रौशन करने
जहां रौशनी का मिलन हो रहा था
वहां तुम्हारा जन्म हो रहा था
हमारी सकारात्मक सोंच का जन्म हो रहा था
जहां रौशनी का मिलन हो रहा था
वहां तुम्हारी कहानी रची जा रही थी।

Written By Radha Rani




अब भी दिल रो देता है

अब भी दिल रो देता है जब भी उन गलियों से गुजरती हूं तेरे होने का एहसास होता है अचानक से कदम खुद रुक जाते हैं और मैं वहीं एक टक तुम्हें वही ढु...