Tuesday, March 27, 2018

तुम हो

तुम हो
मुझे यकीन है कि तुम हो
तुम मेरे आस-पास हो
मेरे अंदर हो
मुझमें समाहित हो
तुम दिखाई तो नहीं देते
बस मैंने तुम्हें महसूस किया है
तुम्हारी महक को,
तुम्हारी होने के एहसास को
बस एक रास्ता है
जो तुम तक जाता है
वहीं रास्ता को पहचानना है
कि तुम हो मुझे यकीन हो ही जाए
की तुम हो.....

Written by Radha Rani

Monday, March 26, 2018

सब्र हर बार अख्तियार किया

सब्र हर बार अख्तियार किया
हमसे होता नहीं, हजार किया
आदतन तुमने कर दिये वादे
आदतन हमने एतबार किया
हमने अक्सर तुम्हारी राहों में
रुककर अपना ही इंतजार किया
फिर ना मांगेंगे जिंदगी या रब
ये गुनाह हमने इक बार किया

Sunday, March 18, 2018

जिंदगी का तड़का

एक लड़का-लड़की जब मिलते हैं तो दोस्ती होती है... नज़रें मिलतीं हैं..और गाना बज उठता है...(राह में उन से मुलाकात हो गयी जिस से डरते थे वही बात हो गयी ...)

फिर रोज का मिलना-जुलना...नजदीकियों का बढ़ना और फिर एक दुसरे से कहना...
(प्यार हुआ, इकरार हुआ है,
प्यार से फिर क्यू डरता है दिल..
कहता है दिल रास्ता मुश्किल,
मालूम नही है कहा मंजिल..)

फिर अचानक से माता-पिता को पता चलना, और फिर प्यार पर पहरा लग जाना....और लड़के का लड़की को समझना...
(फर्स्ट टाइम देखा तुम्हे हम खो गया
सेकंद टाइम मे लव्ह हो गया
ये अक्खा इंडिया जानता है हम तुमपे मरता है
दिल क्या चीज़ है जानम अपनी जान तेरे नाम करता है...)

फिर बहुत मिन्नत के बाद माता-पिता का मान जाना...और शादी के लिए हां कहना...तब मन का एक दुसरे से कहना...
(जो हाल दिल का इधर हो रहा है, वो हाल दिल का उधर हो रहा है, जाने जान दिलो पे प्यार का, अजब सा असर हो रहा है....)

और शादी की तैयारी शुरू हो जाती है....
तो लड़का कहता है...
(उठा ले जाऊँगा तुझे मैं डोली में देखती रह जाएगी सखियाँ तुम्हारी)

फिर लड़की कहती है...(तेरे घर आऊँगी दुल्हन बन जाऊँगी अकेली रह जाएँगी सखियाँ बेचारी...)

भाई भी मन से बहन को प्यार से कहता है...
("बहना ओ बहना तेरी डोली मै सजाऊगा
तेरी जायेगी बरात होगी आंखो से बरसात
हंस-हंस के मै दुखड़ा बिदाई का छुपाउगा "...)

और अंत में पिता अपने नम आंखों से बेटी को कहता है...
(बाबुल की दुआएँ लेती जा जा तुझको सुखी संसार मिले
मैके की कभी ना याद आए ससुराल में इतना प्यार मिले)


फाइनली शादी हो जाती हैं..और कुछ साल हंसी-खुशी रहने के बाद... सिर्फ गाना ही बच जाता है गाने को....
लड़का- जब से हुई है शादी आंसू बहा रहा हूं आफत गले पड़ी है उसको निभा रहा हूं....
लड़की- जब से हुई है शादी आंसू बहा रही हूं आफत गले पड़ा है उसको निभा रही हूं ।

और ज़िंदगी यूं ही चलती रहती है....

राधा रानी....





Saturday, March 17, 2018

खुजली आई रे, आई रे, खुजली आई रे........



पढ़ो और जरुर से कमेंट करो....

सोचो अगर आप कुछ कर रहे हों...और अचानक आपको खुजली होने लगे...मेरी ये बात पढ़ कर हंसी आ रही होगी ...की ये क्या मैं पागलों जैसी बात लिख रही हूँ...हाहाहाहाहाहा......

पर मेरी ये बात हंसने वाली जरूर है, पर सोचने वाली भी है... की आखिर क्यों उसी वक्त खुजली होना शुरू होता है, ये बात आज तक समझ नहीं आया...

हो सकता हो कि ये कोई साइक्लोजिकल प्रौब्लम हो...पर जो भी हो... है तो ये भयंकर.....

अब देखिये, जब आप दोनो हांथो में मेंहंदी लगाए हुए बैठे हैं और बदन का कोई हिस्सा खुजलाने लगे..तब सोचो मानो करंट सा पुरे शरीर में दौड़ने लगता है...लगता है कि कब मेंहदी धो दूं और उस बदन के हिस्से को जोर-जोर से खुजलाऊं, पर मजबुरी, धो भी नहीं सकती...तो उस वक्त अपने बगल में बैठा कोई दोस्त नज़र आते ही ये शुभ काम उसे सौंप दिया जाता है...और फिर जो आराम आता है...मानो, जन्नत नसीब हो गया हो...

कभी-कभी तो आप गाड़ी चला रहें हों...और अचानक से खुजली करने का मन करे ,....उस वक्त आप क्या करोगे...यही ना कि साईड जगह पर गाड़ी रोकने का इंतजार...जब तक कोई साईड जगह न मिले तब तक तो आप खुजला भी नहीं सकते...और अगर आप खुजलाने की सोंचे भी तो...एक्सिडेंट होने का खतरा....तो जैसे ही जगह मिले ...गाड़ी रोको...और भरपुर खुजलाओ...जब तक की आपको मजा न आ जाए.....हाहाहाहाहा ....

पढ़ा ना...तो चलो कमेंट करो.... ;)



Written By- Radha Rani

Sunday, February 25, 2018

आज मैंने अपना बचपन देखा...


आज मैंने अपना बचपन देखा..
खुद को देखा ।
बचपन को जलाकर उस राख से बनती ...
एक औरत को देखा ।
उस औरत के हर एक आकांक्षाओ को ...
हर एक उम्मीद को मरते देखा ।
एक छोटी सी कली को ...
फूल बनते देखा ।
उस फूल को पुजा पर ...
तो कभी पैर के नीचे कुचलते देखा ।
कुचले हुए फूल को फिर से...
जुड़ते हुए देखा ।
आज मैंने अपना बचपन देखा ।
बचपन को जलाकर उस राख से बनती...
एक औरत को देखा ।


Written by Radha Rani

Wednesday, February 21, 2018

वही सुबह...वही जिंदगी


घंटो जद्दोजहद
फिर एक गहरा सन्नाटा
घडी की सुई की आवाज
और मेरी दिल की आवाज
दोनों मेरे कानो में गूंजने लगी
अचानक.........
मेरे दिल ने कहा
क्या हुआ
कुछ भी तो नया नहीं ..
वही तो हुआ है
जो सालों से होता आ रहा है
मेरी सुन........
जा, जी अपनी जिंदगी....
छोड़ दुनिया की फ़िक्र
पर दिमाग ने कहा
क्या कर रही हो....
सिर्फ अपनी सोच रही हो.....
तुम ऐसी नहीं हो....
खुद को पहचानो ....
अचानक से  फिर एक गहरा सन्नाटा
दिल और दिमाग की कशमकश में
जीत दिमाग की हुई
और रोज की भांति
वही सुबह...वही जिंदगी

अब भी दिल रो देता है

अब भी दिल रो देता है जब भी उन गलियों से गुजरती हूं तेरे होने का एहसास होता है अचानक से कदम खुद रुक जाते हैं और मैं वहीं एक टक तुम्हें वही ढु...