Sunday, November 2, 2014

मेरे अरमान

मेरे भी कुछ अरमान थे
मेरे भी कुछ सपने थे
मुभे भी चाहिए था प्यार
मां से, पापा से
भाई से, बहन से
अपने प्यार से प्यार
भरपुर वाला प्यार
सच्चा वाला प्यार
दिल से चाहने वाला प्यार
लेकिन, हमेशा किश्तों में ही मिला
हमेशा प्यार पाने की कोशिश की
पर मिल न सका
अब तो लगता है ये जिन्दगी उधार की है
उधार का प्यार है
अब ऐसा लगता है..
जो भी प्य़ार मुझे मिला
वो तरस से मिला
काश मैं अकेली रह जाती

या रहती ही ना………………




Written by: Radha Rani

Saturday, August 2, 2014

आज जरा मन उदास सा है

आज जरा मन उदास सा है
पता नहीं क्या आस सा है
दिल में तो हैं ढेरो आस
पर मालुम नहीं कौन आस
खास सा है....



Written by: Radha Rani

Wednesday, August 7, 2013

Mujhe accha lagta hai....

Mujhe accha sa lagta hai
Tumhi ko dekhtey rehna

Tumhi ko chahtey rehna
Tumhi ko sochtey rehna

Tumhi ko suntey rehna
Bahot gehre khyaalon me

Jawabo me.. sawaalo me
Mohabbat ke hawaalo me

Tumhara naam aa jaana
Mujhe accha sa lagta hai

Tumhare sang sang chalna
Wafa ke aag me jalna

Tumhe naraz kar dena
Kabhi khud bhi ruth jaana

Tumhari berukhi par bhi
Tumhari aarzoo karna

Khud apne dil ke dharkan se
Tumhari guftugu karna

Mujhe accha sa lagta hai...!!!



Written by: Radha Rani

Friday, August 2, 2013

तुम्हारा साथ.......................


क्यों आखिर क्यों…
क्यों हर बार ऐसा करते हो तुम…
क्यों हर बार परेशान करते हो तुम…
हर बार हमारा दिल तोड़ देते हो तुम…
क्यों आखिर क्यों…
आखिर मैं भी तो इंसान हुं…
मेरे अंदर भी एक दिल है…
जो तुम्हारे लिए धड़कता है…
जो तुम्हें चाहता है…
जो तुम्हें हर पल पाने की आरजु रखता है…
पर..तुम्हें मेरी कहां….
सिर्फ अपनी पड़ी है…
क्यों आखिर ऐसा क्यों…
आखिर ऐसा कैसे कर पाते हो तुम…
कैसे हां कैसे…
मुझे बीच मझधार में छोड़कर…
हमेशा चले जाते हो….
मैं कहुं कुछ तो सही नहीं….
तुम कहो तो सही…
क्यों आखिर क्यों…
मैंने तुमसे क्या मांगा…
सिर्फ तुम्हारा साथ…
तुमसे वो भी ना हो सका…
मैने तुम्हारा हर तरह से साथ दिया…
तुम्हारे सुख में..
दुख में…
पर तुमने क्या दिया…
मैं इसे क्या समझुं…
तुम्हारा प्यार…
या कुछ और..
क्यों आखिर क्यों…

Written by: Radha Rani

Wednesday, July 31, 2013

दर्द...........


दर्द होता है…
बहुत होता है…
पर..बयां नहीं कर पाते…
कैसे करें बयां…
हम समझ ही नहीं पाते…
लोग कहते हैं…
हम वफा नहीं करते…
मगर दोस्तों….
हम वफा तो करते हैं…
पर उन्हें..बेवफाई लगती है…
आखिर केयों नहीं बदलती…
तकदीर "इश्क" की….
क्या वो हमें नहीं चाहते…
या मेरी ही चाहत में कुछ कमी थी…
दर्द होता है…
हां.. बहुत होता है…
पर..बयां नहीं कर पाते…



Written by: Radha Rani

Tuesday, July 30, 2013

उफ! ये चाहत….


चाहत… चाहत… चाहत
उफ! ये चाहत….
हर रोज एक चाहत…
हर वक्त एक नई चाहत…
हर घड़ी एक अलग चाहत…
उफ! ये चाहत….
दिल चाहत के पीछे…
भागता चला जाता है…
और कभी पुरा भी करता है…
फीर भी…..
कभी खत्म नहीं होती है..ये चाहत…
आखिर ये है कौन सी बला…
जो दिल पागल हो जाता है…
उसे पाने को…
उसे अपना बनाने को…
हर किसी को पागल बनाती है ये चाहत…
किसी को काम की चाहत…
किसी को ऐशो-आराम की चाहत…
किसी को पैसों की चाहत….
तो किसी को…
एक सच्चे हमसफ़र की चाहत…
शायद मेरी भी चाहत...
इनमे से एक है…
अगर ये चाहत पुरी हो जाए…
तो दिन-रात की जद्दो-जहद की खत्म हो जाए…
पर ये चाहत…
कभी खत्म ही नहीं होती…
फीर दिल सोचता है…
आखिर कैसे पुरी होगी ये चाहत…
चाहत… चाहत… चाहत
उफ! ये चाहत….

Written by: Radha Rani

Monday, July 29, 2013

Raat-Din

Es raat- din ke chakkar me...
ensaan ek machine ban ke rah gaya hai...
roj wahi subah...
wahi din.. wahi raat.......
lo fir aaj raat aa gai...
ab chain ki nind aayegi...
par ye chain sirf kuch ghanto ke liye...
fir subah hogi....
fir wahi kaam fir wahi din...
fir raat hogi...
par chain sirf kuchh palon ka.
sirf kuchh palon ka....

Written by:-Radha Rani

अब भी दिल रो देता है

अब भी दिल रो देता है जब भी उन गलियों से गुजरती हूं तेरे होने का एहसास होता है अचानक से कदम खुद रुक जाते हैं और मैं वहीं एक टक तुम्हें वही ढु...