Sunday, June 10, 2018

आईने से बैर मत रख


आईने से बैर मत रख
तु आईने से यारी रख
आईना झुठ नहीं बोलता
आईना दिखाता है हकीकत
आईना तुझे संवारेगा
आईना तुझे बिगाड़ेगा
तु रोएगा तो वो रोएगा
तु हंसेगा तो वो हंसेगा
आईने से बैर मत रख
तु आईने से यारी रख।
आईना दिखाता है खामियां
आईना दिखाता है अच्छाईयां
वही है अकेलेपन का साथी
आईना ही तो आज दोस्त है हमदम है
आईने से बैर मत रख
तु आईने से यारी रख।

   Written by Radha Rani

Saturday, June 9, 2018

जहां रौशनी का मिलन हो रहा था



जहां रौशनी का मिलन हो रहा था
वहां एक कहानी रची जा रही थी
वो कहानी जो मेरी थी
वो कहानी जो हमारी थी
वो रौशनी हम ही तो थे
जो वर्षों बाद मिल रहे थे
हम दो रौशनीयों के मिलन से 
तुम आए थे 
हमारी जिंदगी में उजाला भरने
हमारी जिंदगी सवारने
अपने प्यारे से मुस्कान से
मेरी मुस्कान को दोगुना करने
आज तुम ही तो हो 
मेरी आंखों के उजाले
तुम ही तो आए थे
मेरा घर रौशन करने
जहां रौशनी का मिलन हो रहा था
वहां तुम्हारा जन्म हो रहा था
हमारी सकारात्मक सोंच का जन्म हो रहा था
जहां रौशनी का मिलन हो रहा था
वहां तुम्हारी कहानी रची जा रही थी।

Written By Radha Rani




Wednesday, June 6, 2018

मेरे अंदर का बच्चा


मेरे अंदर का बच्चा
अबतक वो बढ़ा नहीं
दुनिया की साजिशों से
अबतक वो मिला नहीं
मेरे अंदर का बच्चा
झट‌ से दोस्त बनाता है
नासमझ है अभी वो
हरवक्त धोखा खाता है
मेरे अंदर का बच्चा
हर पल धुम मचाता है
हरपल कुछ नया करने को
नए-नए तरकीब लगाता है
मेरे अंदर का बच्चा
अपना बचपन भुला नहीं
बचपन की यादों को वो
फिर से वो दोहराता है
मेरे अंदर का बच्चा
अब तक वो मरा नहीं।

Written By Radha Rani

Tuesday, June 5, 2018

एक गिलहरी आंगन में















एक गिलहरी आंगन में
रोज-रोज आ जाती है
अपने नन्हें कदमों की
छाप वो दे जाती है
फुदक-फुदक कर आंगन में
इठलाती बलखाती है
हरपल वो मेरे मन में
एक नया उत्साह जगाती है
एक गिलहरी आंगन में
रोज-रोज आ जाती है

जब भी उसको देखुं तो
मन मेरा कर जाता है
उसको लेकर हाथों में
उसके बदन को सहलाऊं
पर वो इतनी तेज है
कभी नहीं आती हाथों में
पलक झपकते ही झट से
वो गायब हो जाती है
एक गिलहरी आंगन में
रोज-रोज आ जाती है।

Written By Radha Rani

Monday, June 4, 2018

चिड़िया घर से निकली है...

चिड़िया घर से निकली है
मुक्त गगन में उड़ने के लिए
अपने प्यारे पंख फैलाए
नए-नए सपने सजाए
आशाओं के दीप जलाए
प्यारी चिड़िया निकली है।


एक अनोखी उड़ान के लिए
अपनी आकांक्षाओं के लिए
नीत नए सपनों को बुनकर 
उनको पुरा करने
वो चिड़िया निकली है।


चिड़िया घर से निकली है 
गिद्ध की नजरों से बचती
अपने पंख हवा में फैलाए
ठंडी हवा में शान से
मासुम चिड़िया निकली है।

Written By Radha Rani

अब भी दिल रो देता है

अब भी दिल रो देता है जब भी उन गलियों से गुजरती हूं तेरे होने का एहसास होता है अचानक से कदम खुद रुक जाते हैं और मैं वहीं एक टक तुम्हें वही ढु...