Wednesday, August 30, 2017

तुम फिर याद आए हो...


तुम फिर याद आए हो...
यादों की बदली छटी है
कि तुम फिर याद आए हो...
तुम्हारी बातें
तुम्हारी यादें
तुम्हारा हंसना
युं हस के कुछ कहना
कि तुम फिर याद आए हो...
तुम्हारा मुझे समझाना
समझाके खुद रुठ जाना
मेरा तुझे मनाना
हर बात पर मेरी तारीफ करना
कि तुम फिर याद आए हो...
तेरा डरना
डर कर सहम जाना
तेरा मुझे गले लगाना
कि तुम फिर याद आए हो...
यादों की बदली छटी है
कि दोस्त , तुम फिर याद आए हो...
Written by: Radha

सपनो का घर

ये लिखकर मैं अपने एक दोस्त की दर्द को बयां कर रही हुँ......माफी अगर किसी को बुरा लगे...
घर...एक ऐसा ऐहसास जिसका नाम सुनते ही लगता है की जन्नत मिल गया हो...आप कहीं भी रहें, कितना भी व्यस्थ क्यों न रहें, पर घर का नाम सोचते ही एक सुकुन का ऐहसास हो जाता है। अगर बात करें हम मरदों की तो उनका आसियाना एक ही होता है..जहां वो ठाठ से रहते हैं और हक से कहते हैं मेरा घर, मैं घर आ गया ...आदि। उनके मन में कुछ भी अलग तरह की बात मन को विचलित नहीं करती होगी...पर एक महिला की बात करें तो उनको दोघरों को देखकर चलना होता हैं...मायका और ससुराल...दोनो घर के लोगों की फिलींग का ख्याल रखना होता है
पर अगर औरत उन दोनो घरों को सुकुन वाला माने तो ऐसा काफी प्रतिशत कम है...
जब एक लड़की की शादी होती है तो वो बरे अरमान से अपने माता -पिता का घर छोड़कर आती है की उसको उसका अपना घर मिला है..वो बरे आराम से अपने हमसफर के साथ रहेगी बिना किसी रोकठोक के...पर जब वो वहां अकेला महसुस करे...उसको कुछ अच्छा बुरा बताने वाला कोई ना हो तो वो क्या करेगी
...वो अपने मायके जा सुकुन की तलाश करेगी...

कुछ भी कहे जमाना की लड़की ही वजह होती है घर तोड़ने की ...पर मेरा मानना है की परिवार भी जिम्मेवार होता है....
जब कोई भी जानवर को आप तकलीफ देते हैं तो वो प्रतिक्रिया देता है... यहां हम तो इंसान हैं...
एक लड़की के लिए ससुराल दोनो सुरत में सिर्फ एक घर बन कर रह जाता है जब ससुराल में उसपर जुल्म हो या वहां कोई पुछने वाला ना हो...
जब किसी लड़की पर जुल्म होता है तो उसको पता होता है की किसकी गलती है या क्या सुधार करना होगा...पर जहां केई समझे ना, नजरअंदाज कर के उसे रखे ...उसको एहसास दिलाए की तुम कुछ नहीं, तुम्हारी जरूरत नहीं तब क्या करे वो लड़की???...वो मायके के घर में ना सुकुन तलासे???..
इसिलिए जब बहुएं बिमार पड़ती हैं तो मायके आ जाती हैं...ताकी दिमाग से ही नहीं...शरीर से भी आराम पा सके...
क्योंकि मायके में जन्म देने वाली मां जो होती है....

ये लिखकर मैं अपने एक दोस्त की दर्द को बयां कर रही हुँ......माफी अगर किसी को बुरा लगे...

Friday, June 26, 2015

हमारा दो मिनट

हमारा दो मिनट
सबसे प्यारा दो मिनट
सबका दुलारा दो मिनट
आँखों का तारा दो मिनट
सुबह में दो मिनट
शाम होते ही दो मिनट
जब मन चाहे दो मिनट
आधी रात को भी दो मिनट
यारों ये दो मिनट
क्या खत्म हो जाएगा ये दो मिनट???
अब मम्मी कैसे कहेगी
बस दो मिनट…..
 
 
 
Written By:- Radha Rani

Friday, March 20, 2015

दिल इतना खुश है आज













दिल इतना खुश है आज
कि शक सा होता है
कहीं ये सपनो की तरह
सुबह होते ही
आंखो से अोझल ना हो जाए
कहीं ये पानी के बुलबुले की तरह
गायब ना हो जाए
दिल इतना खुश है आज…
कि झुमने को मन करता है
आज हवाअों में उड़ने को मन करता है
अगर आज गम भी आ जाए तो
उसे भी ना आने का
पता देने को मन करता है…..

Sunday, March 8, 2015

जागो नारी जागो


अब ना रुकेंगे
अब ना झुकेंगे
इंकलाब ला के रहेंगे
अपने हक के लिए लड़ेंगे
अपने पे हुए एक-एक
अत्याचार के लिए लड़ेंगे
भागो....... दौड़ो
जागो नारी जागो
अपने अस्तित्व को पहचानों
तुम देवी हो...अबला नहीं
तुमपे जुल्म करने वालों का
तुम ही अब संहार करो
जागो नारी जागो

Written by me

Friday, February 27, 2015

मतलबी दुनिया

दुनिया रे दुनिया
मतलब की दुनिया
मतलबी दुनिया
मतलबी इन्सानों से भरी दुनिया
इस मतलबी दुनिया में
ना है कोई तेरा
ना है कोई मेरा
ना है कोई अपना
ना है कोई पराया
इस मतलबी दुनिया में
जीना है तो मतलबी बन
भुल जा इस मतलबी दुनिया को
भुल जा कोई है तेरा
भुल जा कोई है हर सांस मेरी
बंधी है तुझसे
हर आह मेरी
जुड़ी है तुझसे
तुझे कुछ होता है
दिल मेरा रोता है
सच कहती हूँ
बड़ा बेचैन होता है
जी करता है
भाग के आ जाऊँ
लेकिन क्या करूँ
जी करने से
भला कुछ होता है
तु माने या ना माने
हर वक्त दिल बेचैन होता हैमेरा
दुनिया रे दुनिया
मतलब की दुनिया


Written by me

Tuesday, February 24, 2015

चाहत थी उड़ने की

चाहत थी उड़ने की
बहुत ऊँचा उड़ने की
लेकिन न जाने अब लगता है
मेरे पंख कुतर दिए गए हों
याद है मुझे वो हर बात
जीन बातों पे मेरी हंसी रुकती न थी
पर अब तो चेहरे पर
मायुसी का पहरा है
कुछ सपने थे मेरी आंखों में
जो अब धुंधला-धुंधला सा
दिखाई परता है
मेरे भी थे कई अरमान
मगर उन पर आज किसी का पहरा है
चाहत थी उड़ने की

अब भी दिल रो देता है

अब भी दिल रो देता है जब भी उन गलियों से गुजरती हूं तेरे होने का एहसास होता है अचानक से कदम खुद रुक जाते हैं और मैं वहीं एक टक तुम्हें वही ढु...