Saturday, July 27, 2013

मुझे याद है वो दिन......................................


मुझे याद है वो दिन….
जब हम स्कूल में थे…
कितने सच्चे दोस्त थे हमारे…
आज एक भी नहीं
मुझे याद है…
सब साथ रहने का दावा करते थे…
आज साथ कोई नहीं….
मुझे याद है वो दिन….
जब हमारे पास वक्त ही वक्त था…
आज मिलने का वक्त नहीं….
आज किसे अपना कहें..किसे पराया…
किसे दुश्मन कहें…किसे हमदर्द..
समझ ही नहीं आता…
आज दोस्त…दोस्त ना रहा…
हमदर्द…. हमदर्द ना रहा..
आज अपने..अपने ना रहें…
तो दोस्तों से क्या उम्मीद..
आज सिर्फ वो यादें हैं मेरे पास…
सिर्फ वो यादें…
जो कभी हमारी थीं…
आज सिर्फ मेरी हैं……सिर्फ मेरी…..

Written By: Radha Rani

Thursday, July 18, 2013

क्या कहूं….कैसे कहूं


क्या कहूं….कैसे कहूं
कुछ कहने को रहा ही नहीं…..
रहेगा जब ना…जब मैं रहने दूं….
इंसान सोचता क्या है….
होता क्या है….
चाहत तो बहुत है…
पर वो पुरा कहां होता….
आप चाहते कुछ हो ….
होता कुछ है…
जिंदगी  का क्या….
कभी ढेरो खुशीयां मिलती हैं….
कभी विरानीयां छा जाती हैं…
कभी-कभी तो लगता है….
जिंदगी एक पहेली बनकर रह गई है….
मन कहता है…ज्यादा ना सोचुं….
फीर भी मन उस चाहत की ओर….
खींचा चला जाता है…..
अब कुछ नहीं समझ आता…
जानती हूंबीता हुआ पल लौटता नहीं….
फीर भी एक आस…अभी भी है बांकी…
सायद कुछ हो ऐसा…
सब बदल जाए…..
क्या कहूं….कैसे कहूं
कुछ कहने को रहा ही नहीं…..

Written By: Radha Rani

Friday, July 5, 2013

kyun…aakhir kyun…


Jaante ho donston….
kal Raat mai apne aap se...
ek sala puchhti rahi…
aakhir tune apne aap se...
aisa kyun kiya…
kyun tune apne aap ko…
dhokha diya…
kyun tune apne aap pe…
viswas kiya…
kyun…aakhir kyun…
mai kuch na bol saki…
bolne ko kuch tha hi nahi…
haan maine apne aap ko..
dhokha diya…
haan maine apne aap ko…
paresan kiya….
haan…haan..maine aisa kiya…
karti bhi to kya karti..
kuch samjh hi nahi aaya…
bas karti chali gai..
apne wade aur apne kasmo ko..
bhulati chali gai…
jo maine apne aap se kiya tha…
bas ek sawal aap se ….
aisa kya karun….
jo wapas wahi din aa jaaye
kya karun jo sab thik ho jaaye..
kya karun….aakhi kya karun?????

Written By: Radha Rani

Saturday, January 26, 2013

इन तस्वीरों को खींचते ही फोटोग्राफर की हुई रहस्यमई मौत!


ये तस्वीर दक्षिण सूडान में पड़े सूखे दौरान मार्च 1993 में केविन कार्टर नाम के फोटोग्राफर ने ली थी। तस्वीर में भूख से तड़पती बच्ची एक फूड सेल्टर पर जाने की कोशिश कर रही है, पर उसके रास्ते में खड़ी गिद्ध के कारण वहां नहीं जा पा रही। 
इस तस्वीर के लिए कार्टर को पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। बच्ची की मदद करने के बजाय उसकी तस्वीर खीचने के लिए उन्होंने करीब 20 मिनट तक इस बात का इंतजार किया कि शायद यह गिद्ध बच्ची पर हमला करे। अगर ऐसा होगा तो उनकी तस्वीर और बढ़िया हो जाएगी।
उनकी इस अमानवियता के लिए दुनिया भर में काफी आलोचना हुई। लगातार हो रही आलोचना के चलते तस्वीर खीचने के तीन महीने के बाद ही कार्टर ने आत्महत्या कर ली।



Friday, March 16, 2012

गुल्लर का फूल















एक पुरानी कहानी है कि एक बुढ़िया थी, वह बहुत गरीब थी, वो अपने बच्चे के पालन-पोशन के लिए दही बेचा करती थी...एक दिन वो रोज की तरह दही बेचने के लिए घर से निकली....जब बेचने के बाद शाम को लौटते समय थोड़ा आराम के लिए...एक गुल्लर के पेड़ के नीचे बैठी तो उसके दही के बरतन में एक गुल्लर का फूल गिरा...ऐसा कहा जाता है कि गुल्लर का फूल होता नहीं है ...और होता भी है तो ...रात को ही खिलता है और रात को ही गायब हो जाता है...उस बुढ़िया के बरतन में फूल गिरना एक चमतकार से कम नहीं था....पर उसे पता नहीं था..फिर वो आराम कर के घर को चल दी...जब वो दुसरे दिन...रोज की तरह दही बेचने घर से निकली...तो, वो दही बेचती जाती थी, पर उसके बरतन में दही जस-का-तस ही रहता था ...जब उसे इस बात का पता चला तो वो खुश हुई...और वो बुढ़िया कुछ ही दिनों में बहुत अमीर बन गई.....



आज 21वीं सदी में इस प्रकार के कहानी पर विश्वास करना हमें आज के जमाने के बच्चों से भी छोटा बनाता है...क्योंकि ...आज के जमाने के बच्चे भी कहानी सुनने से पहले उसमें क्या सच्चाई है उसे पुछते हैं...पर ये कहानी कितना सच है, ये तो हम नहीं जानते, पर गुल्लर का फूल भी होता है ये भी एक प्रश्न ही था। पर आज ये साबित हो चुका है कि गुल्लर का फूल होता है और लोग उसे देख और छु भी सकते हैं।



बिहार के दरभंगा जिले में बेनीपुर नाम का एक छोटा सा गांव है...वहाँ सबीर नामक एक दरगाह है...उस दरगाह में एक गुल्लर का पेड़ है...लोगों का कहना है कि 22.08.2006 में इस गुल्लर के पेड़ में एक गुल्लर का फूल देखने को मिला था..और फिर एक बार इस गुल्लर के पेड़ में फूल देखने को मिला है...एक तो गुल्लर का फूल जिसे लोग एक करिश्मा ही मानते हैं..और ऊपर से दरगाह जैसे पवित्र स्थान पर इसका दिखाई देना...इसे लोग एक प्रकार का करिश्मा ही मान बैठे हैं...



मैं पेशे से एक विडियो एडिटर हुँ..जब ये खबर मेरे पास आई तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ... पर जब देखा तो एक अलग सा ऐहसास हो रहा था..सोचिए आपने अपने बचपन में जो कहानियों को सुना हो और आज हकीकत में वो सच लगने लगे तो आपको कैसा लगेगा...वैसा ही कुछ मुझे लग रहा था...गुल्लर का फूल होना एक करिश्मा से कम नहीं पर वैज्ञानिकों का कहना है कि गुल्लर के फूल होते तो हैं पर वो फूल फल के अंदर ही होते हैं...मगर कभी-कभार पांच- साल में एक बार वो फूल हमें दिखाई दे जाता है....पर हमारे समाज में लोग वैज्ञानिकों की बातों को ज्यादा तवज्जुब नहीं देते और उसे भगवन का करिश्मा ही मान लेते हैं.....
















Monday, February 13, 2012

प्रेस का भुत


आज कल लोगों पर प्रेस का भूत इस कदर छाया हुआ है कि वो कभी भी कुछ भी करने के लिये तैयार हो जाते हैं………वो कुछ समझते नहीं और अपने मन कि करते जाते हैं…

उदहारण के लिये ही ले लीजिये………उनका गलत समय पर गलत सवाल करना………हाल ही में मैंने एक न्यूज को एडिट किया ……… जिसमें संवाददाता……… मरने वाले के परिजन से उल्टे सुल्टे सवाल पुछे जा रहा था।

एक और उदहारण ले लिजिए………अब क्या तुक बैठता है कि अपने गाड़ी पर प्रेस लिखवाने के समय गाड़ी पर तीन बार प्रेस लिखवाना……… ऐसे कई उदहारण हैं जिसपे लोग देखते ही हंस परते हैं………।

Monday, May 9, 2011

आपका सच्चा दोस्त



कितना अच्छा लगता है जब आपको कोई प्यार करता है, आपको चाहता है, आपसे खेलता है, आपको देखते ही बेचैन हो जाता हो और आपको उसकी ये आदत कभी अच्छी लगती है तो कभी गुस्सा भी आता है, पर आप उसे कुछ कर या कह नहीं सकते क्योंकी उसको आपकी बाते समझ ही नहीं आतीं।
ऐसा मैं इस लिये नहीं कह रही की मुझे किसी से प्यार हो गया है। अरे ऐसा नहीं है, क्या करे हम इन्सानों के दिमाग में प्यार के नाम से बस एक ही बात आती है कि कोई लडका-लडकी का प्यार ही होगा।
पर ऐसा कुछ नहीं है, ये कोई इंसान नहीं है वो तो एक प्यारा सा छोटा सा कुत्ता है
ऐसे ही मेरे गली में जन्मा हुआ एक छोटा सा कुत्ता है। एक दिन मां ने उसे घर में बुलाकर दुध-रोटी खिला दिया, फ़िर क्या था उसने हमसे, हमारे परिवार से दोस्ती ही कर ली। और अब तो ये उसकी आदत सी हो गई है, वो रोज, जब भी भुख लगती है तो मेरे यहां आ जता है और खाना खा कर चला जाता है, पहले तो ऐसा वो नहीं करता था पर जब से मेरी मां ने उसे खाना खिलाकर एक बार भगा क्या दिया उसदिन से वो वैसा ही करता है।
जब मैं आफ़िस जाने के लिये निकलती हुं वो हमे रोकना शुरु कर देता है, हमारे कपड़े खिचता है तो कभी हमें दौड़ाता है, लोग कहते है कि वो सिर्फ आपके साथ ही ऐसा करता हैं। हमें भी अच्छा लगता है, ऐसा सुनकर।
जी हां आज इंसान से ज्यादा जानवर वफादार हो गया हैं, इंसान तो आपका खाकर भुला देता है पर जानवर कभी नहीं भुलाता। उसका कर्ज जरुर चुकाता है।
ऐसा उदहारण आपने फिल्मों में जरुर देखा होगा।
ऐसा ही कुछ होता है जब हम अपनी मासी के घर जाते है। वहां भी दो कुत्ते हैं । उन से हम रोज तो नहीं मिलते पर जबभी जाते हैं वो इस तरह करने लगता है कि हम उनके साथ ही रहते हो ।
ऐसा देखकर हमें भी अच्छा लगता है।
ऐसा इसलिए होता है कि हम उन्हें प्यार देते हैं, जानवर को अगर हुम प्यार करेगें तो वो भी हमें बदले में प्यार देता है। तो चाहे वो आपका घर का कुत्ता या कोई गली में रह्ने वाला कुत्ता ।

अब भी दिल रो देता है

अब भी दिल रो देता है जब भी उन गलियों से गुजरती हूं तेरे होने का एहसास होता है अचानक से कदम खुद रुक जाते हैं और मैं वहीं एक टक तुम्हें वही ढु...